Thursday

परीक्षा की वह पहली रात

परीक्षा की वह पहली रात

परीक्षा की वह पहली रात
थी तो वह सिर्फ एक रात
काश वो एक रात हो पाती
काश वह सिर्फ कुछ लम्हे वो पाती

क्या कुछ सोचा था करने को
क्या कुछ लिखा था करने को
पूरी रात तुम हमें घूरते रहे और
हम टकटकी लगाए तुम्हारे
खत्म होने का इंतजार करते रहे

काश हम दोनों की बातें ना होती
काश वह रात अनकही ही रहती
सपना तो नहीं की उस रात को भूल जाए
सच भी नहीं कि उसको जिया जाए

परीक्षा की वह घड़ी पास थी
मेरी घड़ी न जाने कहां गुम थी
शायद मेरा समय ही खो गया था
पर खो के वह तुम्हारे पास ही तो आया था
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