Thursday

अँधेरा

अँधेरा

काला अगर पत्थर हा
तो उसकी कोई कीमतनहीं
फिर क्यों जोहरी उसको
हीरा बना देता है
काला अगर पीनी है

तो उसकी कोई किसमत नहीं
तो क्यों भोलेबाबा उसको पीकर
नील कंठ कहलाए जाते हैं
काला अगर चाँद है

तो उसकी बुरी नज़र है
सूरज अगर रोशनी दे
तो वो करवचौथ का चाँद है
काला अगर रूप है

तो इसमे गलती मेरी कहाँ??
माई मेरी काली है
भाई मेरा श्याम है
तो मुझमे खामी कहाँ है??
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